बनभौरी आली टूटण ना दे आस मेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बनभौरी माता भजन

(तर्ज़ :- जा रे हंसा)

कुलदेवी हो के मेरी - क्यूँ सुणती ना अरदास मेरी

बनभौरी मैं बैठण आली - टूटण ना दे आस मेरी...

1) के मैं तेरा बेटा कोन्या - क्यूँ मन्ने तू बिसरा री सै

सारी दुनिया मौज उड़ावे - मन्ने क्यूँ तरसा री सै

तेरी सेवा ही मेरा सच्चा धन सै - तू हे पूँजी ख़ास मेरी...

2) ​जग के ताने सुण-सुण कै माँ - भीतर तक मैं टूट गया

मतलबी दुनिया के चक्कर में - अपणा हाथ भी छूट गया

तेरी शरण में आण पडया सूँ - रखले मैया लाज़ मेरी...

3) ​लोग कहैं सै तेरी चौखट पै - जो आवै वो तर जा सै

सच्चे दिल तै जो भी ध्यावै - झोली उसकी भर जा सै

प्रिंस शुभम नै सारी जिंदगी - मैया जी तेरे नाम करी...

गायक /लेखक

प्रिंस जैन - शुभम रिठालिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।