गुरु चरणों में मेरा संसार

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॥ पावन पाठ ॥

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

गुरु देव... गुरु देव...

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

गुरु चरणों में मेरा संसार,

गुरु चरणों में मेरा संसार।

गुरु चरणों में सुख अपार,

गुरु चरणों में मेरा संसार॥

तेरी कृपा का नहीं है पार,

तेरी महिमा अपरम्पार।

जिसने तेरा हाथ थाम लिया,

उसका हो गया बेड़ा पार॥

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

तेरा नाम ही मेरा आधार,

गुरु चरणों में मेरा संसार॥

जब-जब जीवन राह भटकाए,

गुरुवर तुम ही राह दिखाए।

मन के अंधियारे मिट जाते,

ज्ञान का सूरज उग आए॥

तेरा नाम... तेरा नाम...

हर साँस में तेरा नाम।

तेरा ध्यान... तेरा ध्यान...

हर पल तेरा ध्यान॥

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

तेरी कृपा से जीवन सारा,

खुशियों से भर जाए॥

ना मैं धन का लोभी हूँ,

ना मैं जग की माया चाहूँ।

बस इतनी सी विनती मेरी,

चरणों में तेरे स्थान मैं पाऊँ॥

तेरी शरण... तेरी शरण...

बस तेरी ही शरण।

तेरी दया... तेरी दया...

बस तेरी ही दया॥

तेरे बिना ना कोई अपना,

तेरे बिना ना कोई सपना।

तेरे चरणों की धूल जो पाई,

जीवन बन गया है सपना॥

गुरु चरणों में मेरी आस,

गुरु चरणों में मेरा विश्वास।

जन्म-जन्म तेरा नाम जपूँ,

यही रहे मेरी अरदास॥

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

गुरु चरणों में मेरा संसार...

गुरु चरणों में मेरा संसार...

गुरु देव... गुरु देव...

मेरे गुरु देव... मेरे गुरु देव...

जय गुरु देव... जय गुरु देव...

गुरु चरणों में मेरा संसार...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।