विदुर घर आए बाँके बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

विदुर घर आए बाँके बिहारी

विदुर, घर आए, बाँके बिहारी ॥

बाँके, बिहारी जी, बाँके बिहारी ॥

विदुर, घर आए, बाँके बिहारी...

श्याम को, देख, मगन बिदुरानी ।

फूली, मन में, ना हीं समानी ॥

आँगन, में ठाढ़ी सुध, बुद्ध बिसारी ।

विदुर, घर आए, बाँके बिहारी...

बिदु, रानी अति, मगन भई है ।

तन, मन की उन्हें, सुध ही नहीं है ॥

कहाँ पे, बिठाऊँ मैं, कृष्ण मुरारी ।

विदुर, घर आए, बाँके बिहारी...

फ़ल, छीले और, प्रभु को ज़िमाए ।

कृष्ण, को छिलका, वो देती जाए ॥

खुश, होके खाए देखो, कृष्ण मुरारी ।

विदुर, घर आए, बाँके बिहारी...

प्रबल, प्रेम की, धारा बह रही ।

फल, फेंके और, छिलका खिलाए रही ॥

आनंद, बड़ा आए ये, कहते मुरारी ।

विदुर, घर आए, बाँके बिहारी...

भजे, प्रेम से, जो गिरधारी ।

साँवरिया है, प्रेम पुजारी ॥

भक्तों, के मन भाए, चक्र धारी ।

विदुर, घर आए, बाँके बिहारी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।