जब जब रात का साया जग में गहरा होता है

पारंपरिक
माता दुर्गा मंत्र दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जब जब रात का साया जग में गहरा होता है

श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

चौराहों पर तंत्र मंत्र की जब भी पढ़ती छाया है

मैया के रहते किसी का बुरा नहीं हो पाया है

हर गली कूचे में मां का डेरा होता है

श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

कर्म की मारी भटकी रुहैं जब भी रात को रोती है

कोई नहीं होता जब पास में काली मां ही होती है

उनको मां के आंचल में ही सोना होता है

श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

तांत्रिकों ने काली मां को अपना गुरु ही माना है

महाकाल की महाकाली का भेद ना कोई जाना है

गल मुंडो की माल भुजा का लहंगा होता है

श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

चार कूट और दसों दिशाओं में मां का रूप विकराल है

नैनों में लेकर के ममता चले पवन की चाल है

मैया का भक्तों से रिश्ता गहरा होता है

श्मशानों में काली मां का पहरा होता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।