तन का मोह गया नहीं, तुझे किस विध पाऊँ श्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तन का मोह गया नहीं, तुझे किस विध पाऊँ श्याम

तन का मोह गया नहीं, तुझे किस विध पाऊँ श्याम

मन की खोट गई नहीं, तुझे किस विध पाऊँ श्याम

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

पूछा करमा से जाकर, किस विध पाऊँ श्याम

पूछा करमा से जाकर, किस विध पाऊँ श्याम

बोली करमा भाव का भूखा मेरा प्यारा श्याम

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

पूछा नरसी से जाकर, किस विध पाऊँ श्याम

पूछा नरसी से जाकर, किस विध पाऊँ श्याम

बोले नरसी प्रेम-पाश में बंधते मेरे श्याम

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

पूछा मीरा से जाकर, किस विध पाऊँ श्याम

पूछा मीरा से जाकर, किस विध पाऊँ श्याम

बोली मीरा भक्ति के वश में मेरे प्यारे श्याम

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

पूछा सुदामा से जाकर, किस विध पाऊँ श्याम

पूछा सुदामा से जाकर, किस विध पाऊँ श्याम

बोले मुट्ठी भर चावल में बिकते मेरे श्याम

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

श्याम-रंग रंगना है तो, श्याम जपो प्यारे श्याम

श्याम-रंग रंगना है तो, श्याम जपो प्यारे श्याम

भाव-भक्ति में रम जाओ तो मिल जाएँगे श्याम

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्णा जय जय कृष्णा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।