बजा दो भोले डमरू आज मोरे अँगना

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

बजा दो भोले डमरू आज मोरे अँगना

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे अँगना ॥

ओ आज, मोरे अँगना, आज मोरे अँगना ॥

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे...

डमरू, की धुन में, गणपति नाचे ॥

माँ, रिद्धि-सिद्धि नाचे, आज मोरे अँगना ॥

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे...

डमरू, की धुन में, ब्रह्मा जी नाचे ॥

ओ ब्रह्माणी, संग नाचे, आज मोरे अँगना ॥

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे...

डमरू, की धुन में, विष्णु जी नाचे ॥

माँ लक्ष्मी, संग नाचे, आज मोरे अँगना ॥

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे...

डमरू की, धुन में, राम जी नाचे ॥

माँ सीता, संग नाचे, आज मोरे अँगना ॥

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे...

डमरू, की धुन में, कान्हा जी नाचे ॥

श्री राधा, संग नाचे, आज मोरे अँगना ॥

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे...

डमरू, की धुन में, नारद जी नाचे ॥

ओ बजरंगी, संग नाचे, आज मोरे अँगना ॥

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे...

डमरू, की धुन में, सतिगुरु नाचे ॥

ओ भक्त, जन नाचे, आज मोरे अँगना ॥

बजा दो, भोले डमरू, आज मोरे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।