कहा से आई री गुजरियाआज तु रंगीली होली खेल के

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धून:- मेरे सावरे कहनैया, तु तो बड़ो चित चोर रे

शीर्षक:- कहा से आई री गुजरिया, आज तु रंगीली होली खेल के

कहा से आई री गुजरिया, आज तु रंगीली होली खेल के

आई री गुजरिया आई री गुजरिया आई री गुजरिया

कहा से आई री......

लाल लाल गालन के ऊपर रंग चुचाए रयो है

मस्त प्रेम को नशा तेरी आँख पे छाए रयो है

भौहें हो रही हैं गुलबिया, आज तु रंगीली होली खेल के

कहा से आई री....

होली के हुड़दंग रंग मे भीज रही क्यु गौरी

रंग डालो काउ रंग रसिया ने करके जोरा जोरि

तेरी भीगी हैं जुल्फिया, आज तु रंगीली होली खेल के

कहा से आई री.......

अछयो गई मैं दही बेचवे घर से आज अकेली

घेर लई मैं रंग रसिया ने संग ग्वालन की टोली

मेरी भीजी है चुंदरिया, आज तु रंगीली होली खेल के

कहा से आई री........

विष्णु भैया जी श्याम सखा

सम्पर्क सूत्र:- 7500580057

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।