साड़ी कुंडली च लिखिया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

साड़ी कुंडली च लिखिया है महारानिये,

असी सदा तेरे दर दे गुलाम रहा गये,

तेरे दिते होए साहा दी बनाके माला,

असी जपदे सदा ही तेरा नाम रहा गे

शुद्ध भावना ते सिदक भरोसा रख के तेरे भवना च जोत जगाया करा गे,

भावे धयाणु दी असी चरण धुल वी नही फिर वी ओहदा माँ तेनु धया करा गे,

तेरे दिते होए दोवे हाथ जोड़ के नही माँ तेरी मूर्ति नु करके परनाम रहागे,

साड़ी कुंडली च लिखिया है

एस दुनिया दे सरे रंग भूलके माँ तेरे रंग विच ज़िन्दगी नु रंग ला गये,

सहनु जदो जेहरी चीज दी लोड पाव गी पला आढ़ के माँ तेतो मांग ला गये,

महरा तेरियां ते भरिया भंगरा विचो रहंदे जग दिया नेमता तमाम रहा गये,

साड़ी कुंडली च लिखिया है .....

असी ज़िन्दगी जीन नु जिथे जावा गये तेरा निर्दोष प्यार सड़े नाल होए गा,

तू एडा सदा हर वेले ख्याल रखे गी कदे वी विंगा सदा वाल हॉवे गा,

तेरी ममता दी ठंडी शावे माँ पौंदे हर एक दुःख तो आराम रवा गये,

साड़ी कुंडली च लिखिया है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।