कन्हईया बड़ी कातिल नज़र तुम्हारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हईया बड़ी कातिल नज़र तुम्हारी

कन्हईया बड़ी, कातिल, नज़र तुम्हारी ॥

नैनन, से जब, लड़ गए नैना ॥

तुम जीते, मैं हारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

इन, नैनन से, मीरा, लड़ गई ॥

छोड़ आई, सईंयाँ की, अटारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

इन, नैनन से, कुब्ज़ा, लड़ गई ॥

बड़ी सुँदर, बनाए, दई नारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

इस, नैनन से, गोपियाँ, लड़ गई ॥

उन्हें प्रेम की, लगी, बीमारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

इन, नैनन से, राधा रानी, लड़ गई ॥

वह तो, बिरह से, तड़पी बेचारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

इन, नैनन से, हम सब, लड़ गए ॥

भव से, पार, करो गिरधारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

इन, नैनन में, सात समुन्द्र ।

डूब, गई मैं, इन के अन्दर ॥

हो कित, जाऊँ मोहे, राह न सूझे ॥

मोरी, बँहियाँ, पकड़ गिरधारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

जब से, नैन, लड़े हैं, तुम संग ।

भूल गई, दुनीयाँ के, सब रंग ॥

हुई बावरी, इत्त उत्त, डोलूं ॥

मोहे, प्रेम की, लगी बीमारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

इन, नैनो से, गुरु मंडली, लड़ गई ॥

आई, शरण, तुम्हारी,

कन्हईया बड़ी... जय हो ॥।कातिल...

जय श्री राधे कृष्ण

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।