उमरिया धोखा दे गई रे

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरि भजन मैं कल पे छोड़ा

हरि भजन मैं कल पे छोड़ा

मेरी साँस निकल गई रे उमरिया

उमरिया धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

हरि भजन मैं कल पे छोड़ा

हरि भजन मैं कल पे छोड़ा

मेरी साँस निकल गई रे उमरिया

उमरिया धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

बालापन हँस-खेल गँवाया

बालापन हँस-खेल गँवाया

बालापन हँस-खेल गँवाया

बालापन हँस-खेल गँवाया

भोलेपन में निकल गई रे उमरिया

धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

आई जवानी नींद ना टूटी

आई जवानी नींद ना टूटी

आई जवानी नींद ना टूटी

आई जवानी नींद ना टूटी

सपनों में निकल गई रे उमरिया

धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

ना जाने कब आया बुढ़ापा

ना जाने कब आया बुढ़ापा

ना जाने कब आया बुढ़ापा

ना जाने कब आया बुढ़ापा

अब साँस अटक गई रे उमरिया

धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

हरि भजन मैं कल पे छोड़ा

हरि भजन मैं कल पे छोड़ा

साँस अटक गई रे उमरिया

धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

उमरिया धोखा दे गई रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।