आओ मेरी जगदम्बे आओ महारानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आओ मेरी जगदम्बे

आओ महारानी

ज्योत जगाऊं मैं

तेरी अम्बे रानी

​आओ मेरी जगदम्बे

आओ महारानी

ज्योत जगाऊं मैं

तेरी अम्बे रानी

​

जय जय माँ जय जय माँ

जय जय अम्बे माँ

जय जय माँ जय जय माँ

जय जय अम्बे माँ

​[1]सोने का सिंहासन माँ, तेरे लिए लाया

भक्तों ने मिलकर माँ, दरबार सजाया

अंगना पधारो माँ, करो मेहरबानी

ज्योत जगाऊं मैं, तेरी अम्बे रानी

जय जय माँ...

​[2]लाल चुनरिया माँ, सर पे सुहाए

हाथ में त्रिशूल, माँ के मन भाये

शेर पे सवार होके, आओ महारानी

ज्योत जगाऊं मैं, तेरी अम्बे रानी

जय जय माँ...

​[3]चरणों में तेरे माँ, जब शीश झुकाते

दुःख और दर्द माँ ,सब भूल जाते

भक्तों पे दया करो , माँ वरदानी

ज्योत जगाऊं मैं, तेरी अम्बे रानी

जय जय माँ ....

[4]पूरी और हलवे का, प्रसाद बनाया

कंजका बिठाई माँ, भोग लगाया

दर पे खड़े हैं तेरे, सब अज्ञानी

ज्योत जगाऊं मैं, तेरी अम्बे रानी

जय जय माँ...

​[5] ढोलक और ताली से, रंग जमाया

' इंदु ' ने तेरा मैया भजन सुनाया

सारी दुनिया हुई आज सुहानी

ज्योत जगाऊं मैं, तेरी अम्बे रानी

जय जय माँ...

' इंदु सामाना '

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।