खेड़ापति मंदिर में म्हारा बालाजी विराजे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

खेड़ापति मंदिर में म्हारा बालाजी विराजे।

बालाजी के संग मंगलदास जी विराजे।

दुनिया ने दर्शन दिज़ो गुरुवर, भक्ता ने दर्श दिखाजोे गुरुवर।

घणी घणी खम्मा प्रभुजी, घणी घणी खम्मा, घणी घणी खम्मा गुरुवर, घणी घणी खम्मा।

गुर थे बालाजी खेड़ापति वीर जी, मंगल दास जी हमारे गुरुवर जी।

लाल लंगोटों थारे हाथ में सोटो, खेड़ापति बाबा थारा नाम हे मोटो।

श्रीफल धराऊ बाबा चोलो में चढ़ाऊं, गुड़ चना को बाबा भोग लगाऊं

यो तो दुखियारा दुखड़ा मिटावे जी, यो तो भटक्या ने राह दिखावे जी।

घणी घणी खम्मा प्रभुजी, घणी घणी खम्मा, घणी घणी खम्मा गुरुवर घणी घणी खम्मा।

गुरु थे बालाजी, खेड़ापति वीर जी, मंगल दास जी, हमारे गुरुवर जी।

राम कृपा से ऐसा काम हुआ है, खेड़ापति बाबा थारा मंदिर बना हे।

इस मंदिर में जिस ने दान दिया है, उस भक्ता का बेड़ा पार हुआ हे।

हो थारा चरणा मे, बाबा शरणा में, जीवनराव आया हे, अर्जी लगाए रे

घणी घणी खम्मा प्रभुजी, घणी घणी खम्मा, घणी घणी खम्मा गुरुवर, घणी घणी खम्मा।

गुरु थे बालाजी, खेड़ापति वीर जी, मंगल दास जी, हमारे गुरुवर जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।