आवीं आवीं वे कन्हाई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आवीं आवीं वे कन्हाई,तेरी याद

आंवदी

साढ़े होकेयां नूं,छेड़ छेड़

उकसावदीं

आवीं आवीं वे...

दस्सी मक्खण चुराया,किनें दिन

बीत गए

तैनूं मधुबन आया,किनें दिन बीत

गए

प्यारी बन्संरी सुणांया,किनें दिन

बीत गए

सुंन्दर रास रचाया,किनें दिन बीत

गए

हुंन्दी प्यार दी कहाणीं,ए पुराणीं

जावदीं

आवीं आवीं वे कन्हाई,तेरी याद

आंवदी

साढ़े होकेयां नूं,छेड़ छेड़

उकसावदीं

आवीं आवीं वे...

रंग होली दे उड़ाया,किनें दिन बीत

गए

पिंगा कदंमा ते पाया,किनें दिन

बीत गए

गीत प्रीत वाले गाया,किनें दिन

बीत गए

रूसी राधा नूं मनाया,किनें दिन

बीत गए

आजा पुनैंया दे चन्नां,मसैयां

बुलावंदी

आवीं आवीं वे कन्हाई,तेरी याद

आंवदी

साढ़े होकेयां नूं,छेड़ छेड़

उकसावदीं

आवीं आवीं वे...

छिलड़ केलेयां दे खाया,किनें

दिन बीत गए

सावंल शाह बणं आया,किनें दिन

बीत गए

सोणीं छपरी छवाया,किनें दिन

बीत गए

हत्थ अन्नें तों छुड़ाया,किनें दिन

बीत गए

आजा भगतां दी खिंछ वारे वारे

जावंदी

आवीं आवीं वे कन्हाई,तेरी याद

आंवदी

साढ़े होकेयां नूं, छेड़ छेड़

उकसावदीं

आवीं आवीं...

घोड़े रथ तें नवाया,किनें दिन

बीत गए

चीर सभा च वधाया,किनें दिन

बीत गए

भोग खिचड़ी दे लाया,किनें दिन

बीत गए

ज़हर मीरा नूं पिलाया,किनें दिन

बीत गए

कि भगतां दी याद,तैंनू नहीं

सतावंदी

आवीं आवीं वे कन्हाई,तेरी याद

आंवदी

साढ़े होकेयां नूं,छेड़ छेड़

उकसावदीं

आवीं आवीं...

रहे विरहा दी अग,दिल बिच

दुखदी

किनूं खौंल के सुणांवा,ए

कहाणीं दिल दी

नहीं हजुंआ दी लड़ी,इक पल

टुटदी,

हाये बार-बार सीनें विच,पीड़

उठदी

हरि हारेया पुकार,क्यों नहीं दया

आवदीं

आवीं आवीं वे कन्हाई,तेरी याद

आंवदी

साढ़े होकेयां नूं,छेड़ छेड़

उकसावदी

आवीं आवीं...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।