जहां ले चलोगे,वहीं मैं चलूंगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जहां ले चलोगे,वहीं मैं चलूंगा

जहां नाथ रख लोगे,वहीं मैं रहूंगा

जहां ले चलोगे,वहीं मैं चलूंगा...

यह जीवन समर्पित,चरण में

तुम्हारे

तुम्हीं मेरे सर्वसव,तुम्हीं प्राण प्यारे

तुम्हें छोड़ कर नाथ,किससे कहूँगा

जहां ले चलोगे,वहीं मैं चलूंगा,

जहां नाथ रख लोगे,वहीं मैं रहूंगा

जहां ले चलोगे,वहीं मैं चलूंगा...

ना कोई उलाहना,ना कोई अर्जी

करलो करालो,जो है तेरी मर्जी

कहना भी होगा तो,तुम्ही से कहूँगा

जहां ले चलोगे,वहीं मैं चलूंगा

जहां नाथ रख लोगे,वहीं मैं रहूंगा

जहां ले चलोगे वहीं मैं चलूंगा...

दयानाथ दयनीं,है मेरी अवस्था

तेरे हाथ अब मेरी,सारी व्यवस्था

जो भी कहोगे तुम,वही मैं करूँगा

जहां ले चलोगे,वहीं मैं चलूंगा,

जहां नाथ रख लोगे,वहीं मैं रहूंगा

जहां ले चलोगेवहीं मैं चलूंगा...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।