कौरु नगर बर हो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ऐ कौरु नगर बर हो...

मोला संग देबे माता...

जब पाटनपुर के पाट देवता, संबलपुर समलाई

गढ़ धमतरी के बिलाई ला सुमिरव, डोंगरगढ़ बमलाई रतनपुरी महामाई ला सुमिरव, धमधा के अटल कुंवारी

ऐ कौरु नगर बर हो...

मोला संग देबे माता...

राजिम मा हे राजीव लोचन, जहां त्रिवेणी धाम हे, भोरमदेव मा भोला बिराजे, जग मा जेकर नाम हे चंपारण मा सउहत बैठे, जग के पालनहारी

तोला बंदव तोला बंदव, छत्तीसगढ़ महतारी

ऐ कौरु नगर बर हो...

मोला संग देबे माता...

जब कालकत्ता के काली ल सुमीरव,मैहर शरदा माई

दंतेवाड़ा दांतेश्वरी ल सुमीरव, जतमई घाटा रानी

गड़ नरवर के नरसिंग देवता,परवत गिरजा माई

कालीपुर के भैरव बाबा, दुरुग के चंडी माई

ऐ कौरु नगर बर हो...

मोला संग देबे माता...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।