मुझको कोयल बना दे

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॥ पावन पाठ ॥

मुझको कोयल बना दे साईं तेरे बगियाँ की,

कह तू उड़ती फिरू साईं तेरी गलियाँ में,

मुझको कोयल बना दे.....

छोड़ के आया मैं सारा जमाना,

अपने चरण में देदो टिकाना,

रो रो सुख गए है आंसू मेरी अखियाँ के,

तारा है सबको मुझको भी तारो,

कोयल बना के मुझको सवारों,

अर्जी सुनलेना साईं मेरे मन चितवन की,

एहे मेरे मालिक एहे मेरे स्वामी,

मांगे सलामत तेरी गुलामी,

नैया पार लगा दे साईं मेरी जीवन की,

मुझे कोयल बनादे साईं.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।