अब ना करूँगी बिहारी जी से बतिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सह लूंगी सारी मैं

सह लूंगी सारी मैं जुदाई की रतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

सह लूंगी सारी मैं

सह लूंगी सारी मैं जुदाई की रतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

प्रीत लगाई दिल शरमाया

बेदरदी तू फिर ना आया

बेदरदी तू फिर ना आया

झूठे तेरे वादे श्याम

झूठे तेरे वादे श्याम झूठी तोरी बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

राह तकत बस रह गई अखियां

पागल कर गई मोहे तोरी सखियां

पागल कर गई मोहे तोरी सखियां

दिन तो गुजर गए

दिन तो गुजर गए गुजरे ना रतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

तू भी झूठा तेरी प्रीत भी झूठी

बेदरदी तूने सब कुछ लूटा

बेदरदी तूने सब कुछ लूटा

धड़क रही है मेरी

धड़क रही है मेरी व्याकुल छतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

सह लूंगी सारी मैं

सह लूंगी सारी मैं जुदाई की रतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

अब ना करूंगी बिहारी जी से बतिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।