कन्हैया को एक रोज़

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया को एक रोज़,रो के पुकारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूँगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज...

मेरे साथ होता है,सरेआम तमाशा

है आंखों में आंसू,और दिल मे

निराशा

कई जन्मों से राह में,पलकें बिछाई

ना पूरी हुई एक भी,दिल की आशा

सुलगती विरह की,करो आग ठंडी

भटकती लहर को,दिखा दो

किनारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूंगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज,रो के पुकारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूँगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज...

कभी बांसुरी लेके,इस तट पे

आओ

कभी बनकें घन,मन के अंबर पे

छाओ

बुझा है मेरे मन की,कुटिया का

दीपक

कभी करुणा दृष्टि से,इसको

जलाओ

बता दो कभी अपने,श्री मुख

कमल से

कहाँ खोजनें जाऊं,अब और

सहारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूंगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज,रो के पुकारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूँगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज...

3.कुछ है जो सुंदरता पर नाज करते

हैं,

कुछ है जो दौलत पे नाज करते हैं

मगर हम गुनहगार बन्दे ऐ कन्हैया,

सिर्फ तेरी रहमत पे नाज करते है

कन्हैया को एक रोज रो के पुकारा,

कहा उनसे जैसा हूँ अब हूँ तुम्हारा

वोह बोले की किया क्या दुनिए में

आकर,

मैं बोला की मत भेजना अब

दोबारा

वोह बोले की साधन किये तुनें

क्या क्या,

मैं बोला किसे तुनें साधन से तारा

वो बोले परेशान हूँ तेरी बहस से,

मैं बोला की कह दे तूं जीता मैं

हारा

वो बोले की ज़रिया तेरा क्या है

मुझ तक,

मैं बोला दो दृग बिंदु का है सहारा

कन्हैया को एक रोज,रो के पुकारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूँगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज...

कभी मेरी बिगड़ी बनानें तो आओ,

कभी सोये भाग जगानें तो आओ

कभी मन की निर्बंलता को दे दो

शक्ति,

कभी दिल का साहस बढ़ाने तो

आओ

कभी चरंण अपने धुलाओ तो जानूं,

बहा दी है नैनों से जमुना की धारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूंगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज़,रो के पुकारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूँगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज...

लटकते हुए बीत जाए ना जीवन,

भटकते हुए बीत जाए ना जीवन

चौंरासी के चक्कर में हे

चक्करधारी,

भटकते हुए बीत जाए ना जीवन

सँभालो ये जीवन ए जीवन के

मालिक,

मेरा कुछ नहीं है आप जीते मैं

हारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूंगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज,रो के पुकारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूँगा तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज...

दुनिया वालों ने मुझे दिये है जो

घाव गहरे,

मरहम का काम हो जाये गर तुम

मिलनें आ जाओ

कहो ओर कब तक रिझाता रहूं

मैं,

बदल कर नए वेश आता रहूं मैं

कथा वेदना की सुनतें सुनाते,

हरे घाव दिल के दिखाता रहूं मैं

ना मरहम लगाओ ना हंस कर

निहारो,

कहो किस तरह होगा अपना

गुजारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूंगा

तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज़,रो के पुकारा

कृपा पात्र किस दिन,बनूँगा

तुम्हारा

कन्हैया को एक रोज...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।