कथा सुनाए पार्वती को शिव शंकर भगवान

पारंपरिक
महादेव कथा शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कथा सुनाए पार्वती को शिव शंकर भगवान

सुनते सुनते अमर कथा को बंद हो कान

हां जी हां बंद हो कान

उमा के पड़ गया सोता

हुंकरे दे रहो तोता

पार्वती को शिव ने जब आगे कथा सुनाई

वो पेड़ पे सुन रहो तोता और रहा आवाज लगाई

खबर पड़ी जब शंकर जी को

भटका उसका ध्यान

हां जी हां भटका उसका ध्यान

मौत को दे रहो न्योता

हुंकारों दे रहो तोता

त्रिशूल लिया भोले ने तोते के पड़े पछाड़ी

शिव शंकर दौड़े पीछे और तोता उड़े अगाड़ी

जगह मिली नहीं कही छुपने को

हो गया वो हैरान

हां जी हां हो गया वो हैरान

जान को नाहक खोता

हुंकारों दे रहो तोता

उड़ते उड़ते वो तोता एक घर में घुस गया जाके

एक नार वहाँ पर सो रही वो तो पास पहुंच गया वा के

मोहड़ा खुला देख नारी का

बच गई उसकी जान

हां जी हां बच गई उसकी जान

पेट में ले रहो गोता

हुंकारों दे रहो तोता

पेट बीच तोता ने वा के साल बिता दिए बारह

परेशान वो नारी वा के पेट मरोड़ा मारा

जान बख्श दे मेरी लाला

करूँ तेरा गुणगान

हां जी हां करूं तेरा गुणगान

ध्यान तुम दे लो श्रोता

हुंकारों दे रहो तोता

बोलो शंकर भगवान की जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।