सावन की बरसे बदरिया भोले की नगरिया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सावन की बरसे बदरिया

सावन, की बरसे, बदरिया,

भोले की, नगरिया ॥

रिमझिम, रिमझिम, मेघा बरसे ।

ओ मेघा, बरसे, ओ मेघा, बरसे ।

रिमझिम, रिमझिम, मेघा बरसे ।

चमके, गगन में, बिजुरिया,

भोले की, नगरिया ।

सावन, की बरसे, बदरिया...

माथे, पे चंदा, चम चम चमके ।

ओ चम, चम चमके, ओ चम, चम चमके ।

माथे, पे चंदा, चम चम चमके ।

गंगा, जी मारे, लहरिया,

भोले की, नगरिया ।

सावन, की बरसे, बदरिया...

हाथों, में डम डम, डमरू बाजे ।

ओ डमरू, बाजे, ओ डमरू, बाजे ।

हाथों, में डम डम, डमरू बाजे ।

लागे न, बाबा को, नज़रिया,

भोले की, नगरिया ।

सावन, की बरसे, बदरिया...

पांव, में घुंघरू, छम छम छनकें ।

ओ छम, छम छनकें ओ छम, छम छनकें ।

पांव, में घुंघरू, छम-छम छनकें ।

नाचे रे, भोले, भंडरिया,

भोले की, नगरिया ।

सावन, की बरसे, बदरिया...

देव, ऋषि मुनि, जय जय बोलें ।

ओ जय, जय बोलें, ओ जय, जय बोलें ।

देव, ऋषि मुनि, जय जय बोलें ।

जय हो, गौरा के, साँवरिया,

भोले की, नगरिया ।

सावन, की बरसे, बदरिया...

भक्त, पुकारें, बम बम भोले ।

ओ बम, बम भोले, ओ बम, बम भोले

भक्त, पुकारें, बम बम भोले ।

भीड़ है, बाबा के, दुअरिया,

भोले की, नगरिया ।

सावन, की बरसे, बदरिया...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।