तूने ही मुझे उबारा है, तेरा ही सहारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

(तर्ज – ये बंधन तो प्यार का बंधन है)

जब-जब परेशानी आए,

और दुख ये हमें सताए।

तेरे नाम से ही मेरी मैया,

मेरे तो ग़म ये जाए।

तूने ही मुझे उबारा है, तेरा ही सहारा॥

आँखों में आँसू लेकर,

जब-जब भी चौखट आया।

मेरे आँसू पोंछ के माँ ने,

मुझको तो गले लगाया।

मेरा हरदम साथ निभाती,

मुझे पीड़ा में समझाती।

दुनिया की बुरी नज़र से,

मेरी मैया मुझे बचाती है।

तूने ही मुझे उबारा है, तेरा ही सहारा॥

अपने भी छोड़ के जाते,

और ताने मुझे सुनाते।

अब जल्दी आजा मैया,

हम ये आवाज़ लगाते।

तूने रास्ता मुझे दिखाया,

जहाँ कोई नज़र ना आया।

जब-जब भी मैं तो टूटा,

मैया का बुलावा आया।

तूने ही मुझे उबारा है, तेरा ही सहारा॥

आँखों में तेरी छवि हो,

और मन की बाती बनाऊँ।

अंतिम साँसों तक मैया,

तेरे ही गुण को गाऊँ।

फिर मैया का दिल पिघले,

सुन करके बातें मेरी।

लकी को माँ तू दे दे,

चरणों की धूली तेरी।

तूने ही मुझे उबारा है, तेरा ही सहारा॥

Lyrics – Lucky Shuk।a

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।