झंडे वाली माता है वो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नील गंगन तक जिसका झंडा लहर लहर लहरता है,

झंडे वाली माता है वो झंदेवाली माता है,

इस झंडे को चाँद सितारे झुक झुक करते नमन है सारे,

बोल बोल के माँ के जयकारे,

सूरज भी पूरब से उठ कर जिसको शीश झुकता है,

झंडे वाली माता है वो .......

ठंडी शीतल मस्त हवाए माँ के झंडे को लहराए,

महिमा गाती चारो दिशाए,

शाम सवेरे इन्दर देव भी आरती जिसकी गाता है,

झंडे वाली माता है वो.......

बढ़ा विष्णु और त्रिपुरारी इस झंडे के बने है पुजारी,

पूजा करते बारी बारी,ये झंडा मजबूर ख़ुशी के फूल बरसता है,

झंडे वाली माता है वो .......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।