हाका मार के बुलावे तेरी धी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हाका मार के बुलावे तेरी धी,

के सथे आजा शेरावालिए

तेरा वाजो मेरा लगदा न जी, ऐथे आजा शेरावालिए

जिन्दगी दा दुःख तियां मन च छुपांदिया,

दुःख सुख लैके फेर मावां कोल आंदिया,

कोल वैठ माए-2 जाना तेरा की

ऐथे आजा...

तेरे वाजो मेरा लगदा न जी, ऐथे आजा...

सोण दा महीना तेरा जागा लेया रख मां

पल्ले मेरे तेला है नई, लोका कोल लख मां,

मेरे लिखिया मुकद्दरा च की, ऐथे आजा...

मेरा तेरे वाजो...

दस मैनु फेर कदो खोलेंगी नसीवा नु

जागे विच आके, अज तार दे गरीवा नु

सानु फिकरां तो करदे प्री, केऐथे आजा...

मेरा तेरे वाजो लगदा...

दुःख वाली पंड मेरे सिर तो उतार दे

जागे विच आके मेरे कारज संवार दे, मां गोदी च विठाके मैनु मावां वाला प्यार दे

पांदी रवांगी गी मैं ज्योता विच घी, के ऐथे आजा…...

मेरा तेरे वाजो...

हाका मारके...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।