हुई किरपा तेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज तूने रोनके लगा दी माता रानिये,

जोत मेरे घर भी जगा दी माता रानिये,

आते आते जगे वाली रात आ गई,

हुई किरपा तेरी,

मान के मेरी तू माँ बात आ गी,

हुई किरपा तेरी,

आज मेरी झोपडी के जागे है नसीब माँ,

अब ना कहे गा मुझे कोई गरीब माँ

भर आई खुशियों से आँखे तेरे लाल की,

रखा जब माथा तेरे पैरो के करीब माँ,

तूने सारी फिकरे मिटादी माता रानिये

जोत मेरे घर भी जगा दी माता....

याद सदा आये गी नवराते के ये रात माँ,

इसी तेरे प्यार की हुई बरसात माँ,

मिल गई मुझे मैंने मांगी जो मुराद माँ,

देख मेरे सिर पर है तेरे दोनों हाथ माँ,

सोई तकदीर थी जगादी माता रानिये,

मेरी सारी भूले भुला दी माता रानिये,

खुशियों की लेके माँ सोगात आ गई,

हुई किरपा तेरी....

राज राज पंकज दीदार तेरा पाए गा,

प्यार से पिरोये हार पहनाये गा,

मई जो लिखी है भेटे माँ सुनाये गा,

तूने जो दिया है मैया तुझपे लुटाये गा,

बात तुझे दिल की बता दी मतरानिये,

जोत मेरे घर भी जगा दी माता......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।