हरि हरि मेहंदी माँ

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

हरी हरी मेहंदी माँ मेया तेरे लाल ल्याया

राचणी मेहंदी माँ टाबरिया घोल ल्याया

सोणा सोणा हाथों में झीणी झीणी राचणी

मेहंदी या मन भाई हिवड़े में बस ज्यासी

कारीगरी मांडन की देख मेया सीख आया

राचणी मेहंदी माँ टाबरिया घोल ल्याया

देखरसी जो हाथों न करसी बड़ाई माँ

सांची कहूँ तुझसे ना होसी समाई माँ

थार लिये ही खातिर नमूनों कई चुन ल्याया

राचणी मेहंदी माँ टाबरिया घोल ल्याया

एकर मंडाले माँ हरदम बुलावेली

मेहंदी जब “सुरभि” मांडसी याद म्हारी आवेली

पवन तेरे हरदम माँ मेहंदी मांडे मन च्याह

राचणी मेहंदी माँ टाबरिया घोल ल्याया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।