शाम मेरी आंखो मे वस तेरा नजारा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम मेरी आंखों में बस,

तेरा नजारा है,

तू ही पहचान मेरी,

तू ही पहचान मेरी,

तू ही पहचान मेरी,

तू ही सहारा है,

श्याम मेरी आंखों में बस,

तेरा नजारा है।

श्याम तेरी भक्ति ने ही,

मुझको सिखाया है,

नजराना देकर के हर,

नजारा दिखाया है,

तू ही पहचान मेरी,

तू ही सहारा है,श्याम मेरी आंखों में बस,

तेरा नजारा है।

जपता हूँ नाम तेरा,

मैं तेरा पुजारी हूँ,

तू श्याम दाता मेरा,

और मैं गुहारी हूँ,

चाहत रही ना कोई,

जब से तू निहारा है,

श्याम मेरी आंखों में बस,

तेरा नजारा है।

तेरी ही कृपा से मैंने,

तेरा नाम गाया है,

जो भी है पाया मैंने,

तेरी ही माया है,

मेरी इन सांसों पे,

एहसान तुम्हारा है,

श्याम मेरी आंखों में बस,

तेरा नजारा है।

तू ही है सांझ मेरी,

तू ही सवेरा है,

अलख है जगाई मैंने,

बाकी काम तेरा है,

यूं ही नहीं कहते तुझको,

हारे का सहारा है,

श्याम मेरी आंखों में बस,

तेरा नजारा है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।