चरना विच दे था अमिए

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सिफत सुनी तेरी बड़ी दाती,

बचिया दी फडदी बाह आमिये,

मेनू सारे जग ने ठुकराया चरना विच दे था अमिए,

कोई द्वार नही तेरे द्वार जेहा ना तेरा कोई साहनी है,

वर मंगदे तेतो देव मुनि तू शक्ति आप भवानी है,

ब्रह्मा विष्णु महादेव माये नारद जपदा तेरा ना आमिये,

मेनू सारे जग ने ठुकराया........

दुःख दर्द बन्दोदी दुखिया दे झोली विच खेरा पा दिंदी,

जेहरी डूब दी विच तूफाना दे ओ बेडी बने ला दिंदी

दुखा दिया धूपा विच तपदे बचिया ते करदी छा आमिये,

मेनू सारे जग ने ठुकराया.....

अंखा विचो अथुरु सुक गए ने,

तेरी दीद दी आस लगाई माँ,

मुद्ता तो रहावा तक दे आ भगता दी आस पुगाई माँ,

राही नु उदीका दर्श दिया साड़े पुरे होने चा आमिये,

मेनू सारे जग ने ठुकराया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।