अम्रित है हरि नाम हमारा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अमृत है हरि नाम हमारा,

छोड़ विषय रस पीना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या,

हरि नाम नहीं तो पिना क्या

हरि नाम...

1.काल सदा अपने मद डोले,

ना जानें कब सर चढ़ बोले

हरि का नाम जपो निसवासर,

अगले समय में होना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या,

हरि नाम नहीं तो पिना क्या

अमृत है हरि नाम हमारा,

छोड़ विषय रस पीना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या,

हरि नाम नहीं तो पिना क्या

हरि नाम...

2.भूषन से सब अंग सजया,

पर रसना से हरि नाम ना गाया

ये देह पड़ी रह जावे यहीं पर,

फिर कुंडल और नगीना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या,

हरि नाम नहीं तो पिना क्या

अमृत है हरि नाम हमारा,

छोड़ विषय रस पीना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या,

हरि नाम नहीं तो पिना क्या

हरि नाम...

3.तीरथ है हरि नाम हमारा,

फिर क्यूँ फिरता मारा-मारा

अंत समय हरि हाथ ना आवे,

फिर काशी और मदीना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या,

हरि नाम नहीं तो पिना क्या

अमृत है हरि नाम हमारा,

छोड़ विषय रस पीना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या,

हरि नाम नहीं तो पिना क्या

हरि नाम...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।