तुम्हारी चाहत में हो के पागल, गली गली में भटक रही हूँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,

गली गली मैं भटक रही हूँ ,

कहा मिलोगे तुम मुझको मोहन ,

हर एक जगह पे ढूंढ रही हूँ ,

पता बता दो तो मिलने आऊ ,

हाल ये दिल का तुम्हे सुनाऊ ,

ना बढ़ाओ मुझसे यूं दुरी मोहन ,

हाथ जोड़कर ये कह रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,

गली गली मैं भटक रही हूँ ,

क्या मैं करू जो तुम मान जाओ ,

पास में अपने मुझे बुलाओ ,

कोई तो राह बता दो मोहन ,

हाथ जोड़कर में पूछ रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,

गली गली मैं भटक रही हूँ ,

क्या कुछ तुमसे छुपा हैं मोहन ,

तेरे भरोसे हैं मेरा जीवन ,

जनम जनम से हूँ मैं तो प्यासी ,

जनम जनम से हूँ तेरी दासी ,

दरश को तेरे तरस रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,

गली गली मैं भटक रही हूँ ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।