हक बन दा ए

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आज वे पौनाहारी आजा, तेरा हक बन दा ए

इक वारी दर्श दिखा जा, तेरा हक बन दा ए।

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​तेरे लई मैं चिमटा ले आया - २

चिमटे नू हथ च सजा जा, तेरा हक बन दा ए...

आज वे पौनाहारी आजा...

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​तेरे लई मैं झोली ले आया - २

झोली नू मोढे ते सजा जा, तेरा हक बन दा ए...

आज वे पौनाहारी आजा...

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​तेरे लई मैं सिंगी ले आया - २

सिंगी नू गल च सजा लै, तेरा हक बन दा ए...

आज वे पौनाहारी आजा...

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​तेरे लई मैं पऊंए लै आया - २

पऊंए नू चरणां च पा जा, तेरा हक बन दा ए...

आज वे पौनाहारी आजा...

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​तेरे लई मैं रोट ले आया - २

आके भोग लगा लै, तेरा हक बन दा ए...

आज वे पौनाहारी आजा...

प्रतीक वी चल तेरे दे ते आया -२

इक वारी दर्श दिखा जा तेरा हक बन दा ए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।