कलयुग में आ रे कान्हा, कलयुग में आ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कलयुग में आ रे कान्हा , कलयुग में आ ,

कलयुग में आ के जरा , भक्ति बड़ा ,

हर कोई यहा बस , माया में लगा है ,

माया का पर्दा , यहा सबपे पड़ा है ,

तू आ के माया का , पर्दा हटा ,

कलयुग में आ रे कान्हा , कलयुग में आ ,

कलयुग में आ के जरा , भक्ति बड़ा ,

हर कोई चाहे बस , बंगला और गाड़ी ,

भक्ति नहीं यहा , किसी को भी प्यारी ,

तू आ के दिलो में , भक्ति जगा ,

कलयुग में आ रे कान्हा , कलयुग में आ ,

कलयुग में आ के जरा , भक्ति बड़ा ,

झूठे है रिश्ते यहा , झूठे है नाते ,

कड़वे है बोल और कड़वी है बाते ,

तू आ के रिश्तो में , प्रेम बड़ा ,

कलयुग में आ रे कान्हा , कलयुग में आ ,

कलयुग में आ के जरा , भक्ति बड़ा ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।