भक्तमाल आरती

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आरती भक्तमाल की करिये

भक्ति भाव निज ऊर मे भरिये.

भक्त माल भक्तन की माला

भगतन को प्रिय चरित रसाला

सुनत सप्रेम लाडली लाला

युगल कृपा लई भव निधि तरिये

आरती भक्तमाल की करिये...

भक्त माल प्रभु की अति प्यारी

नाभा अली ने बिरची संवारी

अति आतुर हरि ने ऊर धारी

आपहु याही हिये मे धरिये

आरती भक्तमाल की करिये...

भक्ति भक्त भगवत गुरु चर्चा

हिर्दय संत गुरु प्रभु की अर्चा

लहिये प्रेम बिनु श्रम बिनु खर्चा

पुनि कबहु भव नर नही डरिये

आरती भक्तमाल की करिये...

आरती हरण आरती होवे

सकल कलुष कली कल्मश धोये

हरि हरिजन नि नयननी धोवे

नारायण प्रभु सतत् सुमरिये

आरती भक्तमाल की करिये...

छांटा लाग्या नीर का

पाप मिट्या शरीर का

छांटा लाग्या केसर का

दर्शन हुआ परमेश्वर का.

छांटा लाग्या चंदन का

दर्शन हुया रघुनंदन का

छांटा लाग्या पानी का

नाम लो राधा रानी का

Hemkant jha pyasa

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।