मेरी रूठ गई कालका मनाऊँ कैसे - नया भजन

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी रूठ गई कालका मनाऊँ कैसे

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ कैसे ॥

मनाऊँ कैसे, मैं रिझाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

लम्बे लम्बे, केस मईया, खोले खड़ी है ॥

ओ सिर पे, सोने का मुकुट, सजाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

फूलों के, हार मेरी, मईया न पहने ॥

ओ नर, मुंडो की, माला मैं, पहनाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

लाल लाल, चूड़ा मेरी, मईया ना पहने ॥

ओ उनके, हाथों में खप्पर, सजाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

लाल पीली, चुनरी मईया, ओढ़ती नहीं है ॥

ओ काली काली, चुनरी मैं, लाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

गंगा का, जल मेरी, मईया ना पीवे ॥

ओ मदिरा, का भोग, लगाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

हलवा, और पूरी मेरी, मईया ना खाए ॥

ओ बकरे, का भोग, लगाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

भोले के, ऊपर मेरी, मईया खड़ी है ॥

ओ उनके, पैरों में पायल, पहनाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

आस पास, मईया मेरे, रहती नहीं है ॥

ओ दूर, कलकत्ता मैं, जाऊँ कैसे ॥

मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।