भोले शँकर की दुल्हनिया जग की पालनहारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले शँकर की दुल्हनिया

भोले, शँकर की, दुल्हनिया, जग की पालनहारी ॥

हो जग की, पालनहारी मईया, तीन लोक से न्यारी ॥

भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

ब्रह्माण्ड, देवों से भरा पर, माँ को, कोई न भाया ।

जंगल के, वासी शिव जी पर, मईया का, दिल आया ॥

हो पलट के, रख दी, फिर दोनों ने ॥तीन लोक की काया,

तीनों, लोक हुए आभारी, जग की पालनहारी,

भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

जब संकट, आया देवों पे, माँ ने, उसे संभाला ।

देवों पे, आए संकट को, जग जननी ने टाला ॥

हो एक एक, दानव भूतल से ॥माँ ने, खोज़ निकला,

माँ फिर, असुरों को संहारी, जग की पालनहारी,

भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

शुम्भ निशुम्भ और, रक्त बीज़ को, माँ ने, मार गिराए ।

चण्ड मुण्ड, मधु कैटभ माँ के, क्रोध से, बच न पाए ॥

हो अंत हुआ जब, महिषासुर का ॥सभी देव हर्षाए,

हर्षित, हुए डमरु धारी, जग की पालनहारी,

भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

सारे जग की, माँ कहलाती, हो शिव जी की नारी ।

ध्यान किया, जिसने माँ तेरा, दूर हुई लाचारी ॥

हो लाज़ रखो माँ, किशन भगत की ॥आया शरण तुम्हारी,

मन की, दूर हो, सब लाचारी, जग की पालनहारी,

भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।