बनों गठरी चलो वृन्दावन चलिए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बनों गठरी चलो वृन्दावन चलिए

वृन्दावन चलिए,सांवरे नूं मिलिए

बनों गठरी चलो वृन्दावन

चलिए...

1.अपणें-अपणें कपड़े लेलो,रंग

बिरंगे सूट लेलो

सांवरे दे लई लेलो पीली पगड़ी,

चलो वृन्दावन चलिए

वृन्दावन चलिए,सांवरे नूं मिलिए

बनों गठरी चलो वृन्दावन

चलिए...

2.अपणें-अपणें भांडे लेलो,अपणें-

अपणें बर्तंन लेलो

कटोरी लेलो चम्मच लेलो

सांवरे दे लई लेलो सोणीं मटकी,

चलो वृन्दावन चलिए

वृन्दावन चलिए,सांवरे नूं मिलिए

बनों गठरी चलो वृन्दावन

चलिए...

3.अपणीं-अपणीं सब्जी लेलो,आलू

लेलो करेले लेलो

सांवरे दे लई लेलो माख़णं

मिश्री,चलो वृन्दावन चलिए

वृन्दावन चलिए सांवरे नूं

मिलिए...

4.अपणीं-अपणीं सखियां लेलो,

मोटी लेलो पतली लेलो

काली लेलो गोरी लेलो

सांवरे दे लई लेलो मैंनूं पगली,

चलो वृन्दावन चलिए

वृन्दावन चलिए,सांवरे नूं

मिलिए

बनों गठरी चलो वृन्दावन

चलिए...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।