हरि मिलते हैं हरि गुण गाने से

पारंपरिक
श्री राम भजन विष्णु भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

हरि मिलते हैं हरि गुण गाने से

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हरि, मिलते हैं, हरि गुण, गाने से ॥

नहीं मिलते हैं, सबको रिझाने से ॥

हरि / प्रभु, मिलते हैं... जय हो ॥।हरि गुण...

चाहे, मंदिर में जाओ, चाहे परिक्रमा लगाओ ॥

नहीं, मिलते हैं, घंटी बजाने से ॥

हरि / प्रभु, मिलते हैं... जय हो ॥।हरि गुण...

चाहे, गीता पढ़ो, या रामायण पढो़ ॥

नहीं, मिलते हैं, माला घूमाने से ॥

हरि / प्रभु, मिलते हैं... जय हो ॥।हरि गुण...

तुम, प्रेमी बनो, सबके प्यारे बनो ॥

भगती, मिलती है, सत्संग में, जाने से ॥

हरि / प्रभु, मिलते हैं... जय हो ॥।हरि गुण...

चाहे, गंगा नहा लो, चाहे यमुना नहा लो ॥

नहीं, मिलते हैं, डुबकी लगाने से ॥

हरि / प्रभु, मिलते हैं... जय हो ॥।हरि गुण...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।