बोयतो करे पुकार बाबा

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॥ पावन पाठ ॥

रुणिचे रा राजवी म्हाने अब थारो सहारो

कोई भूल होई तो माफ करो, अब थे ना विसारो

ओ डगमग डोले नाव म्हारी, कोई मिले ना किनारो

बोयतो बुकारे बाबा, बेगा पधारो

ओ डूबतोड़ि नाव म्हारी पार उतारो

दुखां री घड़ी है बाबा, संकट भी भारी

मेणा दे रा लाल सुनो अरज थे म्हारी

ओ मेणा दे रा लाल सुनो अरज थे म्हारी

कष्ट सूं बाबा म्हाने आगे उबारो

बोयतो बुकारे बाबा, बेगा पधारो

डूबतोड़ि नाव म्हारी पार उतारो

हेलो म्हारो सुनियो थे, अजमल रा लाला

हिवड़े सूं ध्यान लगावां, धनिया रुणिचे वाला

भीड़ पड़ी है बाबा, भीड़ पड़ी है धनिया, जूण सुधारो

बोयतो बुकारे बाबा, बेगा पधारो

ओ डूबतोड़ि नाव म्हारी पार उतारो

नीले चढ़कर आयो बाबो, देर ना लगाई

बोयते री नाव बाबा पल में तिराई

बोयते री नाव धनिया पल में तिराई

विनोद सज्जन संग बाबा जस थारो गाओ

बोयतो बुकारे बाबा, बेगा पधारो

डूबतोड़ि नाव धनिया पार उतारो

मामराज लोहरा खाजुवाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।