ऐसे गरज़ रहे हनुमान

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ऐसे गरज़ रहे हनुमान

ऐसे, गरज़ रहे हनुमान,

कि थर थर, काँप रही लंका ॥

कि थर थर, काँप रही लंका,

कि थर थर, काँप रही लंका ॥

ऐसे, गरज़ रहे हनुमान, कि थर थर...

कहे मन्दोदरी, सुनो पिया जी, मेरे मन शंका ॥

उनकी, जानकी, वापस दे दो ।

अमर, रहे लंका,

ऐसे, गरज़ रहे हनुमान, कि थर थर...

एक लख पूत, सवा लख नाती, काहे की चिन्ता ॥

मेघ, नाथ से, पुत्र हमारे ।

कुम्भ, कर्ण भईया,

ऐसे, गरज़ रहे हनुमान, कि थर थर...

पवन देव मेरी, भरे हाज़री, इन्द्र करे सेवा ॥

अग्नि, देव मेरी, तपे रसोई ।

ब्रह्मा, देव सेवा,

ऐसे, गरज़ रहे हनुमान, कि थर थर...

एक वानर, लंका में आया, उज़ड़ गई बगिया ॥

पेड़, उखाड़े, पहरी मारे ।

फूंक, दई लंका,

ऐसे, गरज़ रहे हनुमान, कि थर थर...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।