बचेयाँ निमानिया दा मान रख ला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बचेयाँ निमानिया दा मान रख ला,

देके सहनु दर्श माये माँ आन रख ले,

मान रख ले ...

माँ कदे बच्या तो रूस दी नही,

केहड़ी गलो रुसी सहनु दसदी नही,

भुला बख्श साडा ख्याल रख ले,

बचेयाँ निमानिया दा मान रख ला,

गमवा वाली रात कदे मूकदी नही,

दुखा दी हनेरी कदे छडदी नही,

तेरे हाथ डोर साड़ी शान रख ले,

देके सहनु दरस आन रख ले,

बचेयाँ निमानिया दा मान रख ला,

होर किना रोवा हंजु मूक गये ने,

रो रो मेरी अखा च नही सुक गये ने,

कटा चाहे तार भावे जान रख ले,

देके सहनु दर्श माये आन रख ले,

बचेयाँ निमानिया दा मान रख ला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।