कर ले निज़ काज़ जवानी में

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॥ पावन पाठ ॥

कर ले निज़ काज़ जवानी में

कर ले, निज़ काज़, जवानी में,

इस, दो दिन की, जिन्दगानी मे ॥

मेहमान, जवानी, जाती है ।

फिर, लौट, कभी नहीं आती है ॥

हे मूढ़, इसे मत, खो देना,

तूँ किस्से, और कहानी में ।

कर ले, निज़ काज़...

सौभाग्य ये, नर तन, पाई है ।

बड़े, भाग्य जवानी, आई है ॥

भगवान, इसी में, मिलते हैं,

क्यों, ढूंढे पत्थर पानी में ।

कर ले, निज़ काज़...

तूँ इससे, खोज़, गुरु की कर ।

मिल, जाए तो न, किसी से डर ॥

गुरु, ही सब कुछ के, दाता हैं,

सुन, ले क्या, कहते बानी में ।

कर ले, निज़ काज़...

क्यों, इसको पाकर, भूल रहा ।

निज़, कर्तव्यों को, भूल रहा ॥

इन, भोगों से, मुख मोड़ के देख,

फिर, फर्क, मूर्ख क्या ज्ञानी में ।

कर ले, निज़ काज़...

ज्ञानी, ईश्वर का, प्यारा है ।

सेवक, गुरु भक्त, दुलारा है ॥

जो, गुरु कहते, तूँ मान उसे,

और, कर भक्ति, मर्दानी में ।

कर ले, निज़ काज़...

॥जय गुरुदेव ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।