ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार - ठा. प्रकाश सिंह चौहान भजन

ठा. प्रकाश सिंह चौहान
हनुमान जी भजन कृष्ण भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार -2

जहां बिराजें भैरो बाबा

प्रेतराज सरकार

ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार...

1.तेरे दर की धूल जो पाऊँ,

अपनो जीवन धन्य बनाऊँ,

तेरे चरणों में शीश नवाऊं

हर जनम तुमको ही पाऊँ,

बालाजी विनय सुनलो मेरी

कर दो बेड़ा पार ॥

ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार...

2.तेरे नाम की जोत जगा ली,

दिल में तेरी प्रीत बसा ली,

छोड़ के सारी दुनिया दारी,

तुमसे बाबा आस लगा ली,

अब तो आके थाम लो बाबा ,

मत करना इनकार ॥

ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार...

3.साँझ सवेरे नाम तुम्हारा,

जपता रहता दीन बेचारा,

तेरे बिना सब सूना-सूना,

तुम हो जीवन का उजियारा,

सुन ले दिल की धड़कन बाबा ,

आजाओ इक बार ॥

ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार...

4.तेरे रंग में रंग जाऊँगा मै

हर पल तुझको गाऊँगा मैं,

तन-मन तुझपे वार दिया है,

ये जीवन तेरे नाम किया है,

अपनी शरण में रख लो बाबा ,

मेरे प्राण आधार ॥

ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार...

5.जग ने मुझको बहुत सताया,

अपनो ने ना साथ निभाया,

तेरे नाम का दीप जलाकर,

इस दिल को मैंने समझाया,

अब तो तुम ही मेरे साथी,

तुम ही पालनहार ॥

ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार...

6.छोड़ दिया सब तेरे खातिर,

पाया सब तेरे द्वार पे आकर,

तेरे सिवा कोई और ना मेरा,

देख लिया इस जग में रहकर ,

तेरे चरणों में रख दी बाबा

मैने अपनी लाज

ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार...

लेखक- ठा. प्रकाश सिंह चौहान

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।