म्हारा हरिया बन रा सुवटिया

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

म्हारा हरिया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे,

राम मिले तो कहिजे रे,

घनश्याम मिले तो कहिजे रे,

म्हारा हरीया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे॥

पांच तत्व का बणिया पिंजरा,

ज्यामे बैठ्यो रिज्ये रे,

यो पिंजरों अब भयो पुराणों,

नित नई खबरां दिज्ये रे,

म्हारा हरीया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे।

राम मिले तो कहिजे रे,

घनश्याम मिले तो कहिजे रे,

म्हारा हरीया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे॥

इस पिंजरे के दस दरवाजा,

आतो जातो रहिजे रे,

अरे रामनाम की भरले नोका,

नित भजना में रहिजये रे,

म्हारा हरीया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे।

राम मिले तो कहिजे रे,

घनश्याम मिले तो कहिजे रे,

म्हारा हरीया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे॥

काम क्रोध मद लोभ त्याग ने,

गुरु चरणा में रहिजये रे,

मीरा के प्रभु गिरधरनागर,

चित चरणा में रहिजये रे,

म्हारा हरीया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे।

राम मिले तो कहिजे रे,

घनश्याम मिले तो कहिजे रे,

म्हारा हरीया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे॥

म्हारा हरिया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे,

राम मिले तो कहिजे रे,

घनश्याम मिले तो कहिजे रे,

म्हारा हरीया बन रा सुवटिया,

तने राम मिले तो कहिजे रे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।