मन तूँ भज ले गुरु का नाम

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॥ पावन पाठ ॥

मन तूँ भज ले गुरु का नाम

मन तूँ, भज ले, गुरु का नाम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का नाम ॥

तेरे, बनेगे बिगड़े काम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का नाम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का नाम...

दया, मेहर से, नर तन पायो x॥

मत, करना अभिमान,

मन तूँ, भज ले, गुरु का नाम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का नाम...

एक दिन, ख़ाली, जाना पड़ेगा x॥

जाए, वसो शमशान,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

जो धन, तुझको, दिया गुरु ने x॥

उससे, कर कुछ काम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

अंत, समय, यूँ ही लुट जाएगा x॥

इससे, करो कुछ काम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

यह, संसार, रैन का सुपना x॥

आए, किया विश्राम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

चार, दिनों के, संगी हैं सब x॥

अंत ना, आवे काम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

ता ते, चेत, करो सत संगत x॥

भजन, करो आठों याम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

यही, भजन तेरे, संग चलेगा x॥

पाएगा, आराम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

दया, मेहर, सतगुरु से लेकर x॥

चलो, सच्च खण्ड धाम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

काल, करम से, बंधन छूटे x॥

मिले, पुरुष सतनाम,

मन तूँ, भज ले, गुरु का...

॥जय जय गुरुदेव नमो नमः ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।