भक्ति करते छूटे मेरे प्राण

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भक्ति करते छूटे मेरे प्राण

भक्ति करते, छूटे मेरे प्राण,

प्रभु / हरि जी, यही मांगूँ रे ॥

रहे जनम, जनम तेरा ध्यान,

प्रभु / हरि जी, यही मांगूँ रे ॥

भक्ति करते, छूटे मेरे प्राण...

तेरी भक्ति मे, खुद को, मिटाता चलूँ ।

तेरी महिमा, निरंतर, सुनाता चलूँ ॥

तेरा गाऊँ, सदा गुण गान,

प्रभु जी, यही मांगूँ रे...

भक्ति करते, छूटे मेरे प्राण...

तेरा मुखड़ा, मनोहर मैं, देखा करुँ ।

आठों याम, भजन तेरा, बोला करुँ ॥

रहे, अंत समय, तेरा ध्यान,

प्रभु जी, यही मांगूँ रे...

भक्ति करते, छूटे मेरे प्राण...

मेरी आशा, निराशा, करना नही ।

मेरे अवगुण, ह्रदय में, धरना नही ॥

रटूँ स्वाँस, स्वाँस तेरा नाम,

प्रभु जी, यही मांगूँ रे...

भक्ति करते, छूटें मेरे प्राण...

मेरे पाप, और ताप, मिटा देना ।

मुझको, चरणों का सेवक, बना लेना ॥

छूटे, काम क्रोध, और मद मान,

प्रभु जी, यही मांगूँ रे...

भक्ति करते, छूटे मेरे प्राण...

काल माया के, झूले में, झूलूँ नहीं ।

निस दिन तेरे, चरणों को, भूलूँ नहीं ॥

दाता देना, यही वरदान,

प्रभु जी, यही मांगूँ रे...

भक्ति करते, छूटे मेरे प्राण...

अपने, दासों का, दास बना लो मुझे ।

अपने, चरणों में, नाथ जगह दो मुझे ॥

देना, आ कर, दर्शन दान,

प्रभु जी, यही मांगूँ रे...

भक्ति करते, छूटे मेरे प्राण...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।