साडे घर होया जगराता

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गले विच पटके ते मथे उते रोलियां,

हाथ विच बनिया सी माई दिया रोलिया,

साडे घर होया जगराता भंगरे मैं पावा,

गल देके भगता नु फिर लोका नु सदिया है,

तू घर आ माँ भवानी तेतो बस एहे मंगेया है,

पूजा किती नाले तेरी जोत जगाई है,

साडे घर होया जगराता ...

सबतो पहला मन्ता ने तेरा आध गणेश मनाया,

पकिया भेटा नाल आंबे सभना ने खूब रिजाया,

झांकिया वी कड़ियाँ ते वारियां वी लितियाँ,

सबना दी नजर उतारा भंगरे मैं पावा,

साडे घर होया जगराता .......

तेरे भगता दे चेहरे ते आज राज राज लालियाँ छाइया,

लिखी दता ने भेटा संजय ने राज राज गाइया,

कथा वि किती तेरी आरती वी गई है

तेनु मात न कदे भुलावा,

साडे घर होया जगराता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।