मूरख बंदे रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मूर्ख बन्दे क्या है रे जग में तेरा,

ये तो सब झूठा सपना है कुछ तेरा न मेरा,

मूर्ख बन्दे क्या है रे जग मै तेरा

कितनी भी माया जोड़ ले कितने भी महल बना ले,

पर तेरे मरने के बाद में सुन तेरे ये घर वाले,

दो ग़ज कफ़न उड़ा के तुझको छीन ले गे तेरा डेरा,

मूर्ख बन्दे क्या है रे जग मै तेरा...

कोठी बांग्ला कारे देख क्यों तू इतना इतराता है,

पत्नी और बच्चो के बीच तू फुला नहीं समाता है,

ये तो चार दिनों के चांदनी है अरे फिर आएगा अँधेरा,

मूर्ख बन्दे क्या है रे जग मै तेरा...

मूरख अपनी मुकति का तू जल्दी कर उपाए,

अरे किसी दिन किसी घडी जाने तेरी बाह पकड़ ले जाए,

तेरे साथ में घूम रहा है बनकर काल लुटेरा,

मूर्ख बन्दे क्या है रे जग मै तेरा...

पाप कम्या तूने बहुत अब थोड़ा धर्म कमाले,

कुछ तो समय अब मानव तू राम नाम गन गा ले,

राम नाम से मिट जायेगा जन्म मरण का फेरा,

मूर्ख बन्दे क्या है रे जग मै तेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।