दरबार बुला लो माँ एहसान तेरा होगा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दरबार बुला लो माँ एहसान तेरा होगा

धुन- होठों से छूह लो तुम

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा ।

मुझे,अपना, बना लो माँ, अहसान तेरा होगा।

एक, बार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा ।

मैं फ़ूल, कमल का हूँ, कीचड़ में खिलता हूँ ॥

चरणों से, लगा लो माँ, अहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

बागों, से फ़ूल चुने, मैंने हार बनाया है ॥

इसे, आप पहन लो माँ, एहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

मैं, बेटी तेरी हूँ, तूँ माता मेरी है ॥

ये रिश्ता, निभा लो माँ, एहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

मुझे, जग ने ठुकराया, माँ तुम ना ठुकराना ॥

आँचल में, छुपा लो माँ, एहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

मेरे, मन के, मन्दिर में, तस्वीर तुम्हारी है ।

तेरे, इन हाथो में, तकदीर हमारी है ॥

तकदीर, बना दो माँ, एहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

तुम, देख रही हो माँ, मै देख नहीं सकता ।

माँ, बेटे का परदा, कभी हो ही नहीं सकता ॥

परदे, को हटा दो माँ, एहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

तुम, अष्ट भुजी हो माँ, तेरा रुप निराला है ।

तेरे, शीश मुकुट मईया, ग़ल मोतियन माला है ॥

अब, दर्श, दिखा दो माँ, अहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

मै धूल का, फूल हूँ माँ, दुनियाँ की ठुकराई ।

मै गिरती, सम्भलती माँ, दरबार तेरे आई ।

चरणों, से लगा लो माँ, एहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

तूँ ही, है जग जननी, ओ शेरोँ वाली माँ ।

निर्बल, का सहारा हो, ओ शक्तिशाली माँ ।

दुष्टों, को संहारो माँ, एहसान तेरा होगा ।

दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।