भैंरु जी मतवाला थे जग का रखवाला

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : ये रेशमी ज़ुल्फें

भैंरु जी मतवाला थे जग का रखवाला

मेरी नाव को भी संभालो जरा

बाबा रींगस में थारो धाम है

सारी दुनिया में थारो नाम है

काम मेरा भी बन जाए बंद नसीबा खुल जाए

पतवार को भंवर से निकालो जरा ...

सारी दुनिया का ठुकराया हूं

मैं गिरते संभलते आया हूं

उम्मींद मेरी अब टूटे ना और द्वार तेरा यह छूटे ना

संकट से मुझे अब बचा लो जरा ...

कोई पैदल चल कर आता है

कोई पेट पलनियाँ आता है

अपनी अपनी श्रृद्धा है अपनी अपनी विपदा है

दुविधा दास की अब हटा लो जरा ...

सारी दुनिया से नाता तोड़ लिया

खुद को तेरे दर से जोड़ लिया

शर्मा दर पे आया है सैनी शीश झुकाया है

अर्ज है चरणों से अब लगा लो जरा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।