मैया जी आ जो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चंदन दी चोंकी धावा,

उते तेरी जोत जगावा,

फिर तेरियां भेटा गावा,

मैया जी आ जो,

तेरियां उदीका विच बेठे आ मैया जी,

होर ना सहारा कोई ओट तेरी मैया जी,

वेखा मैं तेरियां राहा आवे ते सदके जावा हर दम तेरा शुकर मनावा

मैया जी आ जो....

तेरे बिना न मेरा कोई हमदर्दी न सुनिया तू भगता दे दुखड़े वी हरदी माँ,

सुनले तू मेरिया आहवा करदे तू ठंडिया शावा तेरे रो एहो चावा,

मैया जी आ जो......

आवे ते खुशिया दे विच पागल होवा मैं,

नैना चो अथुरा दा तेल वी चोवा मैं,

एक पल वी चैन न पावा,सो तेरी अख न लावा रो रो के एहो गावा,

मैया जी आ जो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।