दतिये करदे रेहमता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चढ़ के चढ़ैया मैयां दर तेरे आनी आ,

चरना दे विच बह के मैं तरले पानी आ,

चढ़ के चढ़ैया दर तेरे आनी आ,

जग दी सताई होई तेनु मैं सुनानी आ,

दतिये करदे रेहमता......

दिल करे सदा तेरे चरना च रवा मैं,

दुनिया दे गेरिया च कदे ना पावा मैं,

जग दी सताई होई तेनु मैं सुनानी आ,

दतिये करदे रेहमता....

कलि आते फुला उते हस दे ने हसे माँ,

दिसदी है तू मेनू जिस पासे देखा मैं,

जग दी सताई होई तेनु मैं सुनानी आ,

दतिये करदे रेहमता.....

कमली दीवानी सारे लोकी मेनू कहन माँ,

उड़ गिया नींदरा ते पुस गये चैन माँ,

जग दी सताई होई तेनु मैं सुनानी आ,

दतिये करदे रेहमता.....

अपने ही रंग विच माँ मेनू वी रंग दे,

विषये वकारा नु माँ सूली उते टंग दे,

नचके सलीम ने महिमा तेरी गाणी आ,

जग दी सताई होई तेनु मैं सुनानी आ,

दतिये करदे रेहमता.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।